मुझे अख़बारों की दुनिया में आए हुए बहुत दिन नही हुए । मैं अभी अदना सा हूँ । पर यह सोच कर परेशान हो रहा हूँ की अगर पुब्लिक को पता चल जाए की न्यूज़ रूम में क्या होता है तो मीडिया पर भरोसा करना छोड़ दे । हमारा काम खबरें देना है । खबरें गढ़ना नही । सच में लोकतंत्र के इस स्तम्भ को संभालना होगा । पब्लिक बहुत दिनों तक माफ़ नही करने वाली ।
भारतीय दर्पण टीम
तुम आदत में शुमार हो मेरी
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प्याली से उठती भाप
जाने कहाँ खो गई
चाय की उस आखिरी
चुस्की के साथ
मगर चाय का स्वाद
घुल रहा है अब भी
जुबान पर मेरी
और नथुनों में बस रही है
...
2 हफ़्ते पहले
2 टिप्पणियां:
आप जैसे युवाओँ से बदलाव आशा है. शुभकामनाऐं.
धोनी का कहना है "जिद करो दुनिया बदलो",लेकिन मै यही कहूँगा की "ख़ुद अपनी दुनिया बदलो."
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