मेरी एक दोस्त खंडाला में होटल मैनेजमेंट का कोर्स कर रही है। एक दिन पहले फ़ोन आया कि उसने होटल में कम करने का इरादा बदल दिया है। ताज और ओबेरॉय में जो कुछ हुआ इससे उसके मम्मी पापा परेशां हैं। वो डरे हुए हैं।
बात सही है। डरे हुए तो सभी हैं। लेकिन डर कर दूर भागना कहाँ तक सही है। सभी माँ बाप यही सोचते हैं कि उनका बेटा सही रहे। सुरक्षित रहे।
खैर फ़ैसला तो हमें लेना है। अगर नौकरी करने से दूर भागने लगे तो ताज का नवनिर्माण कौन करेगा। जो काला धब्बा हमेशा सालने के लिए मिला है। वो दूर कैसे होगा।
आख़िर भारत माँ का भी तो saval है।
तुम आदत में शुमार हो मेरी
-
प्याली से उठती भाप
जाने कहाँ खो गई
चाय की उस आखिरी
चुस्की के साथ
मगर चाय का स्वाद
घुल रहा है अब भी
जुबान पर मेरी
और नथुनों में बस रही है
...
2 हफ़्ते पहले